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बिहार में घूसखोरी पर लगाम नहीं: रोज पकड़ रहे अधिकारी, फिर भी नहीं बदल रही ‘रिश्वत संस्कृति

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सीमांचल के किशनगंज में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कार्रवाई सामने आई है, जहां निगरानी विभाग की स्पेशल टीम ने बाल विकास परियोजना से जुड़ी एक वरिष्ठ अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई ने पूरे जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है और सरकारी योजनाओं में चल रहे कथित भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिश्वत लेते ही जाल में फंसी अधिकारी

सूत्रों के अनुसार, पटना से पहुंची स्पेशल विजिलेंस यूनिट (एसवीयू) की आठ सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को सुनियोजित तरीके से ट्रैप बिछाया। शिकायत की पुष्टि होने के बाद टीम ने सह प्रभारी डीपीओ अनीता कुमारी को उनके निजी आवास पर ही 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। जैसे ही पैसे उनके हाथ में पहुंचे, टीम ने मौके पर ही कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया।

शिकायत से शुरू हुई थी पूरी कार्रवाई

बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला पौठिया के सीडीपीओ नागेंद्र कुमार की शिकायत से शुरू हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विभागीय लाभ दिलाने के नाम पर भारी रकम की मांग की जा रही थी। निगरानी विभाग ने पहले गुप्त जांच कर आरोपों की पुष्टि की और फिर ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया।

10 लाख की मांग, लाखों की बरामदगी

जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी अधिकारी पर करीब 10 लाख रुपये की कुल रिश्वत मांगने का आरोप है। फिलहाल 50 हजार रुपये की पहली किस्त लेते समय उन्हें गिरफ्तार किया गया। छापेमारी के दौरान उनके आवास से भारी मात्रा में अतिरिक्त नकद भी बरामद हुआ है, जिसकी गिनती जारी है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक रकम लाखों में बताई जा रही है।

बड़ी डील से जुड़ा बताया जा रहा मामला

एसवीयू के डीएसपी लव कुमार ने संकेत दिया है कि मामला किसी सामान्य रिश्वत तक सीमित नहीं, बल्कि विभागीय स्तर की एक बड़ी आर्थिक डील से जुड़ा हो सकता है। बरामद दस्तावेजों और नकदी के आधार पर आगे की जांच में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

निगरानी मुख्यालय में होगी पूछताछ

गिरफ्तारी के बाद अधिकारी को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पटना स्थित निगरानी मुख्यालय ले जाने की तैयारी की गई। विभाग ने साफ किया है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक हलकों में मचा हड़कंप

इस कार्रवाई के बाद आईसीडीएस सहित कई विभागों में खलबली मच गई है। अधिकारियों के बीच यह संदेश गया है कि निगरानी विभाग अब भ्रष्टाचार के मामलों में पूरी सख्ती के साथ सक्रिय हो चुका है।

बिहार में घूसखोरी पर लगाम नहीं: रोज पकड़ रहे अधिकारी, फिर भी नहीं बदल रही ‘रिश्वत संस्कृति’

बिहार में घूसखोरी पर लगातार हो रही कार्रवाइयों के बावजूद व्यवस्था पर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं। एक-दो नहीं, बल्कि लगभग हर सप्ताह किसी न किसी विभाग का अधिकारी रिश्वत लेते हुए पकड़ा जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी भ्रष्टाचार का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा। ताज़ा मामलों ने फिर यह बहस तेज कर दी है कि आखिर डर किस बात का नहीं है—कानून का, कार्रवाई का या नैतिक जिम्मेदारी का?

कार्रवाई तेज, लेकिन आदत नहीं बदल रही

निगरानी और विशेष जांच एजेंसियां लगातार ट्रैप बिछाकर अधिकारियों को रंगे हाथ पकड़ रही हैं। हर गिरफ्तारी के बाद सख्त संदेश भी दिया जाता है, मगर कुछ समय बीतते ही वैसी ही दूसरी खबर सामने आ जाती है। इससे साफ संकेत मिलता है कि भ्रष्टाचार अब सिर्फ “व्यक्तिगत लालच” नहीं, बल्कि कई जगहों पर एक प्रणालीगत बीमारी का रूप ले चुका है।

क्यों नहीं खत्म हो रही घूसखोरी?

विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं—पकड़े जाने के बाद मुकदमों का वर्षों तक लंबित रहना
विभागीय स्तर पर सख्त आंतरिक निगरानी की कमी
रिश्वत को “रूटीन प्रक्रिया” समझ लेने की मानसिकता
और सबसे बड़ा कारण—कठोर उदाहरण की कमी
जब तक कुछ मामलों में त्वरित और कठोर सजा का व्यापक संदेश नहीं जाएगा, तब तक डर की भावना मजबूत नहीं बन पाएगी।

जनता की नजर में गिरती साख

लगातार हो रही गिरफ्तारियों से सरकारी तंत्र की छवि पर भी असर पड़ रहा है। आम लोगों में यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि बिना पैसे के काम होना मुश्किल है। इससे न सिर्फ जनता का भरोसा टूटता है, बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।

सुधार की जरूरत—डर नहीं, व्यवस्था बदले

विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ पकड़ने से समस्या खत्म नहीं होगी। जरूरत है—
डिजिटल पारदर्शिता बढ़ाने की
फाइल ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करने की
और जवाबदेही तय करने की
जब तक व्यवस्था ऐसी नहीं बनेगी कि रिश्वत लेना “असंभव” हो जाए, तब तक कार्रवाई के बावजूद समस्या बनी रह सकती है।

बड़ा सवाल यही—क्या बदलेगा सिस्टम?

लगातार हो रही गिरफ्तारियां एक तरफ सरकार की सक्रियता दिखाती हैं, लेकिन दूसरी तरफ यह भी बताती हैं कि व्यवस्था के भीतर भ्रष्टाचार कितनी गहराई तक फैला है। अब नजर इस बात पर है कि क्या बिहार में सिर्फ गिरफ्तारी की खबरें आती रहेंगी, या सचमुच ऐसा बदलाव होगा जिससे अधिकारी रिश्वत लेने से पहले सौ बार सोचें।

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